परिचय - नवीन सी चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

मकानों के नगर में हम अगर कुछ घर बना लेते


मकानों के नगर में हम अगर कुछ घर बना लेते।
तो अपनी बस्तियों को स्वर्ग से बढ़ कर बना लेते॥

हमें अपने इलाक़ों से मोहब्बत हो नहीं पाई।
वगर्ना ज़िंदगी को और भी बेहतर बना लेते॥

समय से लड़ रहे थे और लम्हे कर दिए बरबाद।
हमें करना ये था लम्हात का लश्कर बना लेते॥

ग़नीमत है कि जंगल के उसूलों को नहीं माना।
वगर्ना आशियानों को अजाइब-घर बना लेते॥

अगर सौदा ही करना था उसे तो बोल तो देता।
मोहब्बत के लिए हम दिल को भी दफ़्तर बना लेते॥

हवस हैराँ न कर पाती तलब तन्हा न कर पाती।
अगर हम हसरतों को प्यार का सागर बना लेते॥

कहीं ऐसा जो हो पाता कि लड़ते ही नहीं हम तुम।
बहुत मुमकिन था हर कंकर को शिव-शंकर बना लेते॥

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