अब इस से बढ के भला क्या कमाल होना है


अब इस से बढ के भला क्या कमाल होना है।
हमें ही अगली सदी का सवाल होना है॥

हम उस पतंगे 1 की मानिन्द ही तो हैं जिस का।
विसाल 2 होते ही बस इन्तक़ाल 3 होना है॥

हम इस जहान के सबसे बड़े नजूमी 4 हैं।
हमें पता है कहाँ-कब हलाल होना है॥

सब अपने-अपने क़बीलों को इत्तला कर दो।
सभी को सब के लिये इस्तेमाल होना है॥

तरक़्क़ियों को तलाशा तो ये समझ आया।
किसे ग़रीब किसे मालामाल होना है॥

ये वो गुलिस्ताँ नहीं है सभी को है मालूम।
मगर तमाशा अभी डाल-डाल होना है॥

चलो यहाँ से रिहाई का इन्तज़ाम करें।
यहाँ तो रोज़ नया एक वबाल होना है॥

कमाल ही तो कहा जायेगा ‘नवीन’ तुम्हें।
मिसाल बख़्शे बिना बे-मिसाल होना है॥



1 कीट ( यहाँ नर मधुमक्खी के लिये प्रयुक्त) 2 मिलन 3 मृत्य 4 ज्योतिषी, भविष्यवक्ता 

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