मेरी पहिचान – अनासिर मेर


मेरी पहिचान – अनासिर 1 मेरे।
मुझ को ढ़ोते हैं मुसाफ़िर मेरे॥

इस क़दर बरसे हैं मुझ पर इल्ज़ाम।
पानी-पानी हैं मनाज़िर 2 मेरे॥

अस्ल में सब के दिलों में है कसक।
ख़ुद मकीं 3 हों कि मुहाजिर 4 मेरे॥

अब कहीं जा के मिला दिल को सुकून॥
मुझ से आगे हैं मुतअख्खिर 5 मेरे॥


1 तत्व 2 दृश्य 3 गृहस्वामी 4 शरण पाने वाला 5 पीछे आने वाले, अनुगामी

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