दिल के दरवाज़े तलक बू-ए-वफ़ा आने दे

दिल के दरवाज़े तलक बू-ए-वफ़ा 1 आने दे।
धूल उड़ती है तो उड़ने दे - हवा आने दे॥

जाने वाले से भला इतनी मुहब्बत क्यों कर।
दिल की टहनी प कोई फूल नया आने दे॥

वो बहुत जल्द किसी और की हो जायेगी।
रोक मत - उस को - सुबूतों को जला आने दे॥

मौत! वादा है मेरा, साथ चलूँगा तेरे।
बस ज़रा उस को कलेज़े से लगा आने दे॥

ज़ख्म ऐसा है कि उम्मीद नहीं बचने की।
जब तलक साँस है, नज़रों की शिफ़ा 2 आने दे॥

दर्द में चैन वो आयेगा कि बस पूछ ही मत।
दिल के ज़ख़्मों प ज़रा रंग हरा आने दे॥

मैं भी कहता हूँ कि ये उम्र इबादत की है। 
दिल मगर कहता है कुछ और मज़ा आने दे॥

1 वफ़ा की ख़ुशबू  2 दवा 

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