परिचय - नवीन सी चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

ये रोज़-रोज़ का ही रूठना-मनाना क्या


ये रोज़-रोज़ का ही रूठना-मनाना क्या।
मुहब्बतों में सनम जीतना हराना क्या।।

पराई आँखों से जलधार को बहाना क्या।
नहीं है प्यार तो फिर प्यार का बहाना क्या।।

कभी तो इश्क़ नदी में उतर कर भी देखो।
नदी किनारे ही पानी को छपछपाना क्या।।

न फूल जैसी छुअन और न ख़ार जैसी चुभन।
पुरानी यादों को अब ओढ़ना-बिछाना क्या।।

अब उसको बाँहों में भरने का दिल नहीं करता। 
जो अपना है ही नहीं उस पे हक़ जताना क्या।।

कभी वनों को जलाया कभी बुझाये चराग़।
हवाओ तुमने किसी के मरम को जाना क्या।। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें