कब तक यों ही बैठे रहोगे परदा कर के

कब तक यों ही बैठे रहोगे परदा कर के।
ख़ुद को भी मायूस करोगे ऐसा कर के॥

हम वो सितारे हैं जो दिन को भी दिखते हैं।
नाहक ढूँढ रहे हो हमको अँधेरा कर के॥

बड़े दिनों के बाद कोई संजोग बना है।
अब तो जलवा दिखला भी दो शैदा कर के॥

बुनते-बुनते प्रीत-चदरिया बुन पाई है।
गँवा न देना इसको रेज़ा-रेज़ा कर के॥

नहीं छूटता आँखों वाली मय का चस्का।
फिर से आज गटक बैठे हैं तौबा कर के॥

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