अजीब हाल है फिर भी हमें मलाल नहीं॥
कई दिनों से ये जुमला नहीं सुना हमने।
भले भुला दे मगर कल्ब 1 से निकाल नहीं॥
तेरी ख़मोशी तो तेरा ज़वाब है लेकिन।
मेरी ख़मोशी किसी के लिये सवाल नहीं॥
अब इस से बढ़ के तेरी शान में कहूँ भी क्या।
तेरा कमाल यही है तेरी मिसाल नहीं॥
जनम के बाद दुबारा वली 2 न बन पाये।
क़ज़ा3 के बाद भी ओहदा हुआ बहाल नहीं॥ *
1 दिल 2 सन्त, ज्ञानी 3 मौत
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संदर्भ चौरासी लाख योनियों के भ्रमान्न के उपरांत घोर तप कर
के द्वारा सन्त अवस्था प्राप्त होने पर जीव को प्रभु कृपा से पुन: मनुष्य योनि में
जन्म मिलता है परन्तु माया वश जन्म लेते ही नश्वर संसार की माया उसे पुन: पाप-चक्र
में ढकेल देती है जिस के फलस्वरूप मनुष्य औसतन पापकर्मों में लिप्त हो कर पुन: चौरासी लाख योनियों के चक्कर में फँस जाने को बाध्य होता है

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