जाने किसकी लगी है नज़र।
राह आती नहीं राह पर।।
बेबसी की हदें देखिये।
बह रहे हैं नदी में शजर 1।।
याँ पहुँचकर हुआ तज’रबा।
ये फ़लक 2 तो है बस आँखभर।।
सीढियों पर बिछी है हयात 3।
ऐ ख़ुशी! हौले-हौले उतर।।
चाहे जितने भी होठों पै हो।
झूठ चलता नहीं उम्रभर।।
हम तो पानी हैं, दरपन नहीं।
कैसे गिनवाएँ अपने हुनर।।
1 पेड़
2 आकाश 3 ज़िन्दगी

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