परिचय - नवीन सी चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

जब कि थे बीसियों ज़ाविये रंग में


जब कि थे बीसियों ज़ाविये रंग में।
हम ने ढूँढे फ़क़त मसअले रंग में॥

दीन लफ़्फ़ाज़ियों की बलि चढ गया।
आ गया नुक़्स अच्छे-भले रंग में॥

तुझ को तेरे ही ख़तावार सम्हाले हुये हैं


तुझ को तेरे ही ख़तावार सम्हाले हुये हैं ।
दिल तेरी बज़्म को दिलदार सम्हाले हुये हैं ॥

इश्क़ एक ऐसी अदालत है जिसे जनमों से ।
उस के अपने ही गुनहगार सम्हाले हुये हैं ॥

हवा के ज़ोर पे ज़ोर अपना आज़मा कर देख


हवा के ज़ोर पै ज़ोर अपना आज़मा कर देख । 
न उड़ सके तो कम-अज़-कम पतंग उड़ा कर देख ॥ 

फिर इस जहान की मिट्टी पलीद कर देना । 
पर उस से पहले नई बस्तियाँ बसा कर देख ॥