परबत बाग़ बगीचे नदियाँ मेरे चारों ओर
बिखरी पड़ी हैं कितनी ख़ुशियाँ मेरे चारों ओर
इन ही के हाथों में हैं जादू वाली छड़ियाँ
खेलती रहती हैं जो परियाँ मेरे चारों ओर
संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)
परबत बाग़ बगीचे नदियाँ मेरे चारों ओर
बिखरी पड़ी हैं कितनी ख़ुशियाँ मेरे चारों ओर
इन ही के हाथों में हैं जादू वाली छड़ियाँ
खेलती रहती हैं जो परियाँ मेरे चारों ओर
ब-यादे इरशाद खान सिकन्दर
यूँ
तो वो बिल्कुल पानी के जैसा था
लेकिन
उसपर रंग नहीं चढ़ पाता था
रूह
थिरकने लगती थी सुनकर उसको
बानी में इक ढोल खड़कता रहता था
विसालो-हिज़्राँ की नद्दियों की रवानियों में हमारा क्या है
सनम हैं तो हम भी हैं वगरना कहानियों में हमारा क्या है
जो खंडरों को सजा रही है हम उस उदासी के हैं शहंशा’
महल दुमहलों में रक़्स करती वीरानियों में हमारा क्या है