Ghazals of Navin C. Chaturvedi
संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)
बात जब दिल बदन से करता है।
तब कहीं आदमी सँवरता है॥
आब जब आग से गुजरता है।
इक नई शय का नक़्श उभरता है॥
बात सुनता नहीं हवाओं की।
आब धरती पे ही उतरता है॥
आदमी भूलता नहीं कुछ भी।
बा-ज़रूरत फ़क़त मुकरता है॥
अपने कल की ही फ़िक्र है सब को।
कौन दुनिया में रब से डरता है॥
आब - पानी
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