परिचय - नवीन सी चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

परबत बाग़ बगीचे नदियाँ मेरे चारों ओर

 

परबत बाग़ बगीचे नदियाँ मेरे चारों ओर

बिखरी पड़ी हैं कितनी ख़ुशियाँ मेरे चारों ओर

 

इन ही के हाथों में हैं जादू वाली छड़ियाँ

खेलती रहती हैं जो परियाँ मेरे चारों ओर

यूँ तो वो बिल्कुल पानी के जैसा था

 ब-यादे इरशाद खान सिकन्दर

 

यूँ तो वो बिल्कुल पानी के जैसा था

लेकिन उसपर रंग नहीं चढ़ पाता था

 

रूह थिरकने लगती थी सुनकर उसको

बानी में इक ढोल खड़कता रहता था

विसालो-हिज़्राँ की नद्दियों की रवानियों में हमारा क्या है

 

विसालो-हिज़्राँ की नद्दियों की रवानियों में हमारा क्या है

सनम हैं तो हम भी हैं वगरना कहानियों में हमारा क्या है

 

जो खंडरों को सजा रही है हम उस उदासी के हैं शहंशा’

महल दुमहलों में रक़्स करती वीरानियों में हमारा क्या है

ख़ुश्क सहराओं की तक़दीर बदल आते हैं

आप साथ आएँ तो कुछ दूर टहल आते हैं
ख़ुश्क सहराओं की तक़दीर बदल आते हैं
 
क्या किया जाय मुक़द्दर में लिखी है कुटिया
यों तो अपने भी ख़यालों में महल आते हैं 

उस की उन मदभरी आँखों में हया भरते हुये


उस की उन मदभरी आँखों में हया भरते हुये।
बोलना भूल गये लोग सदा भरते हुये॥

उस बलानोश की आँखों का यही है फ़रमान।
और बदलाव करो रंग नया भरते हुये॥

हवा का हाथ परों से जो मैं बँटाता हूँ

हवा का हाथ परों से जो मैं बँटाता हूँ।
ये मुझ प फ़र्ज़ है साहब मैं इक परिन्दा हूँ॥

मेरी उदास नज़र को न कोसिये साहब।
मैं बारिशों में तरसता हुआ पपीहा हूँ॥

बर्फ़ अगरचे पिघल रही होगी

 

बर्फ़ अगरचे पिघल रही होगी

बात कर पर ही टल रहेगी

 

आज हम इतना मुस्कुराये हैं

बेकली हाथ मल रही होगी

कहा था जिसको सहेली, उसी ने काट दिया

 

कहा था जिसको सहेली, उसी ने काट दिया 

तुम्हारा नाम तुम्हारी सखी ने काट दिया

 

कहो तो लेप लगा दूँ तनिक वहाँ भी मैं

कटिप्प्रदेश जहाँ करधनी ने काट दिया

बिछाकर रासतों में ख़ार तुमने

 

बिछाकर रासतों में ख़ार तुमने

दुखाया दिल मेरा क्यों यार तुमने

 

ख़याल अब कौन रक्खेगा तुम्हारा

मुझे भी कर दिया बीमार तुमने

न जाने रीत किसने प्रीत की ऐसी बनाई है

न जाने रीत किसने प्रीत की ऐसी बनाई है

ये ऐसा रोग है जिसमें मसीहा ही दवाई है

 

भला ऐसे मरज़ में तंदुरुस्ती कौन चाहेगा

मुहब्बत में तो बस बीमार रहने में भलाई है

तुमको पल-पल सता नहीं सकता

तुमको पल-पल सता नहीं सकता

सच बता कर रुला नहीं सकता

 

सच यही है कि इश्क़ है तुमसे

मैं बहाने बना नहीं सकता

गिनती होती थी जिनकी किरदारों में

 

गिनती होती थी जिनकी किरदारों में

डूब गये पाज़ेबों की झनकारों में

 

एक समय ऐसा भी हमने देखा है

होड़ हुआ करती थी जब ख़ुद्दारों में

किन्हीं हाथों से छीना जा रहा हूँ

 

किन्हीं हाथों से छीना जा रहा हूँ

किन्हीं हाथों में सौंपा जा रहा हूँ

 

मैं ख़ुशबूओं में रहना चाहता था

सो मिट्टी में मिलाया जा रहा हूँ

आदमी के हाथ में पैसे नहीं हैं

 

आदमी के हाथ में पैसे नहीं हैं

दोस्त ये हालात कुछ अच्छे नहीं हैं

 

हम वही हैं शून्य खोजा था जिन्होंने

अब इशारे तक समझ पाते नहीं हैं

देख ले ज़ालिम तेरे हाथों के तोते उड़ गये

 देख ले ज़ालिम तेरे हाथों के तोते उड़ गये
है सलामत इश्क़ नफ़रत के परख़चे उड़ गये
 
चैन से मिलजुल के दाने चुग रहे थे खेत में
इक ज़रा आहट हुई सारे परिन्दे उड़ गये

पहिचान लीजिये न इशारे बहार के

 

पहिचान लीजिये इशारे बहार के

दहलीज़ पै खड़े हैं नज़ारे बहार के

 

जब-जब भी हमने गेसू सँवारे बहार के

हमको मिले हैं सारे सहारे बहार के

मुझे ये बात परेशान कर रही है बहुत

 

मुझे ये बात परेशान कर रही है बहुत

अना जहान का नुक़्सान कर रही है बहुत

 

भले ही जश्न में तब्दील हो रही है हसद

मगर मुझे तो पशेमान कर रही है बहुत

हँसता और हँसाता है बेबात कभी रोता ही नहीं

 एक ग़ज़ल मुम्बई शहर के नाम 

हँसता और हँसाता है बेबात कभी रोता ही नहीं

सारी दुनिया सो जाये ये शहर कभी सोता ही नहीं

 

हमने इसको हर आगत का स्वागत करते देखा है

किसी की राहों में काँटे ये शहर कभी बोता ही नहीं

अपुन दौनों के ग़म अब एक जैसे रह नहीं पाये

 

अपुन दौनों के ग़म अब एक जैसे रह नहीं पाये

तभी तो आपसे हम दिल की बातें कह नहीं पाये

राज़ खुल भी गया तो क्या होगा

 

राज़ खुल भी गया तो क्या होगा

बस हक़ीक़त से सामना होगा

 

अगली बारिश को मुन्तज़िर है वह

उसका दुख वो ही जानता होगा

वो मुसीबत खड़ी हो गयी है

 

वो मुसीबत खड़ी हो गयी है

हर ख़ुशी मुल्तवी हो गयी है

 

इस क़दर है घुटन ज़िन्दगी में

शायरी लाज़िमी हो गयी है

मज़ाक उड़ाती हुई बेरुख़ी ने काट दिया


मज़ाक उड़ाती हुई बेरुख़ी ने काट दिया 

बवाल दिल में तेरी दिल्लगी ने काट दिया

 

अनेक बार तअल्लुक़ के तार जोड़े गए

हरेक बार कनेक्शन किसी ने काट दिया

टैटू पै दिल के तीर का टैटू बना दिया

 

टैटू पै दिल के तीर का टैटू बना दिया

माख़ौल जैसी बात को मौजू बना दिया

 

पल भर को तो लगा कि हमीं पर फ़िदा है वह

फिर जल्द ही समझ गए बुद्धू बना दिया

नज़्म - वो अपने मम्मी पापा की बड़ी प्यारी सी इक लड़की

 

वो अपने मम्मी पापा की बड़ी प्यारी सी इक लड़की

मेरे घर को सजाने ब्याह कर जब घर मेरे आयी

तो मैं ने ख़ुद से पूछा इसकी भी कुछ हसरतें होंगी

तमन्नाएं तो मेरी तर्ह इसके दिल में भी होंगी

ये बाबुल के महल को छोड़ कर आयी है मेरे साथ

तुम्हारी ना में जो हाँ है शरारत इसको कहते हैं

तुम्हारी ना में जो हाँ है शरारत इसको कहते हैं
और इस हाँ में जो ना ना है मुसीबत इसको कहते हैं
 
भले लड़ना, झगड़ना, रूठ जाना, पर मनाने पर
गले से आ के लग जाना मुहब्बत इसको कहते हैं 

उदास रात का पिछला पहर बनाती हुई

 

उदास रात का पिछला पहर बनाती हुई

तेरी तलाश बयाबाँ में घर बनाती हुई

 

मैं उजले दिन को भी शब की तरह सजाता हुआ

सियाह शब को मगर तू सहर बनाती हुई

याद आता है वो मंज़र आज भी अक्सर हमें

 

याद आता है वो मंज़र आज भी अक्सर हमें

आँखों से आवाज़ देता था कोई पैकर हमें

 

इक ज़रा सा लम्स वो भी था निगाहों का फ़क़त

और गागर में दिखाई दे गया सागर हमें

उम्मीद से लबालब ऐसा वचन मिला है

 

उम्मीद से लबालब ऐसा वचन मिला है

दिखने में तो है सीपी लेकिन रतन मिला है

 

ऐ रूह अपने रब का तू शुक्रिया अदा कर

कहते हैं जिसको आदम उसका बदन मिला है

तजरबा तो तजरबे की तर्ह आता है हुज़ूर

 

तजरबा तो तजरबे की तर्ह आता है हुज़ूर

इल्म जितनी जल्द हो जाये वो अच्छा है हुज़ूर

 

वो मेरा विश्वास है मेरा सहारा है हुज़ूर

मैं भँवर में था मुझे उसने बचाया है हुज़ूर

कहीं मग़रूर हो जायें न हमतुम

 

कहीं मग़रूर हो जायें न हमतुम 

नशे में चूर हो जायें न हमतुम

 

रहे दिल्ली भले ही दूर हमसे

दिलों से दूर हो जायें न हमतुम

समय है नाम इसका इस समय कुछ भी न बोलेगा

 

समय है नाम इसका इस समय कुछ भी न बोलेगा

गुबारे फूल जायेंगे तो ज़ालिम पिन चुभो देगा


जगाना काम है उसका ज़मीर अब भी है ड्यूटी पर

मगर तू जाग पायेगा अलारम तो जगा देगा

अब आवै तो फ़क़त उसकी ख़बर आवै

अब आवै तो फ़क़त उसकी ख़बर आवै।
सुकूनो-चैन जिसको देखकर आवै।।

हम उसके वासते नीलाम हो जाएँ।
मगर दिलबर में दिलबर तो नज़र आवै।।

भुला दिया है जो तू ने तो कुछ मलाल नहीं


भुला दिया है जो तू ने तो कुछ मलाल नहीं।
कई दिनों से मुझे भी तेरा ख़याल नहीं।।

तेरी ख़मोशी तो तेरा जवाब है लेकिन।
मेरी ख़मोशी किसी के लिए सवाल नहीं।।

मैं वज्ह पूछ ही न सका बेवफ़ाई की


मैं वज्ह पूछ ही न सका बेवफ़ाई की।
थी रस्म आज उस के यहाँ मुँह-दिखाई की।।

क़ातिल बता रहा है नज़र है क़सूरवार।
किस वासते है उस को ज़ुरूरत सफाई की।।

जब ज़माने के फ़सानों के मुक़ाबिल हुए हम


जब ज़माने के फ़सानों के मुक़ाबिल 4 हुए हम।
तब कहीं इश्क़ के इसकूल में दाख़िल हुए हम॥ 

छन-छनन करते हुये आते हो छा जाते हो।
इस अदा ही पै हुज़ूर आपके क़ाइल 1 हुये हम।।

भले ही तुमने प्रीत निभाई सौदा कर के


भले ही तुमने प्रीत निभाई सौदा कर के ।
फिर भी कहो यह क़र्ज़ उतारें हम क्या कर के ॥

दुनिया भर की ख़ुशियाँ हमने वारीं तुम पर ।
तुमने सौंपा सब का दर्द इकट्ठा कर के ॥

नज़र जो चाहती थी वह दिखा क्या


नज़र जो चाहती थी वह दिखा क्या।
निगाहों का सफ़र पूरा हुआ क्या॥

हमारे दरमियाँ जो मर'हले थे।।
उन्हें कोई फ़साना मिल सका क्या॥

तुमने गर नाचीज़ को महफ़िल लिखा था


तुमने गर नाचीज़ को महफ़िल लिखा था।
हमने भी तुमको महे-कामिल लिखा था।।

क्या ज़माना था कि इक-दूजे को हमने । 
ज़िन्दगी का ख़ुशनुमा हासिल लिखा था ।। 

चैन घटता जा रहा है क्या मुसीबत पाल ली


चैन घटता जा रहा है क्या मुसीबत पाल ली। 

दिल बहुत घबरा रहा है क्या मुसीबत पाल ली॥

 

दिल लगाया दिल दिया दिल को दिलासे भी दिये।

अब समझ में आ रहा है क्या मुसीबत पाल ली॥

कभी ख़ुशियों का कभी ग़म का सिरा काटूँ हूँ


कभी ख़ुशियों का कभी ग़म का सिरा काटूँ हूँ ।
उसको हमराज़ बनाने की सज़ा काटूँ हूँ।।

ख़ुदकुशी करने का मुझ को भी कोई शौक़ नहीं।
उस की ख़ुशियों के लिये अपना गला काटूँ हूँ ॥