अब जैसे
भी हुई हो भलाई हुई तो है।
नाकामियों
ने राह दिखाई हुई तो है॥
इस बार
बात बनने के इमकान हैं बहुत।
ग़म के
सिवा ख़लिश भी सवाई हुई तो है॥
संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)
चहचहाते थे लड़कपन में परिन्दों की तरह ।
आजकल राम रटा करते हैं तोतों
की तरह ।।
अब तो मुश्किल से नज़र भर के
कोई तकता है ।
बस टँगे रहते हैं हम चाँद-सितारों की तरह ।।
खाली-पीली वबाल क्या करना ।
आओ सीखें मुक़ाबिला करना ।।
जिनकी बुनियाद ही मुहब्बत हो
।
उनके हक़ में सदा दुआ करना ।।