परिचय - नवीन सी चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

हाय रे नादानियाँ उफ़ क्या समझ बैठे हैं हम

 हाय रे नादानियाँ उफ़ क्या समझ बैठे हैं हम
दिल जो दुश्मन है उसे बच्चा समझ बैठे हैं हम
 
इल्म है सच बोलना आता नहीं उसको मगर
उसके झूठे प्यार को सच्चा समझ बैठे हैं हम 

 उसका कहना है कि अपने दरमियाँ कुछ भी नहीं
कितनी सीधी बात है उल्टा समझ बैठे हैं हम
 
अहमकाना हाल का अहवाल ऐसा है हुज़ूर
ज़ख़्म जो पाया उसे बोसा समझ बैठे हैं हम
 
इसलिए ही तो हमारे ज़ख़्म भर पाते नहीं
हर पराई पीर को अपना समझ बैठे हैं हम
 
सामने है नूर पर हम तक रहे हैं हुस्न को
जो समन्दर है उसे दरिया समझ बैठे हैं हम

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