हाय रे नादानियाँ उफ़ क्या समझ बैठे हैं हम
दिल जो दुश्मन है उसे बच्चा समझ बैठे हैं हम
इल्म है सच बोलना आता नहीं
उसको मगर
उसके झूठे प्यार को सच्चा समझ बैठे हैं हम
उसके झूठे प्यार को सच्चा समझ बैठे हैं हम
कितनी सीधी बात है उल्टा समझ बैठे हैं हम
ज़ख़्म जो पाया उसे बोसा समझ बैठे हैं हम
हर पराई पीर को अपना समझ बैठे हैं हम
जो समन्दर है उसे दरिया समझ बैठे हैं हम
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