परिचय - नवीन सी चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

तुम्हारा दिल है जिसे भी चाहो उसे बसाओ, हमारा क्या है

 तुम्हारा दिल है जिसे भी चाहो उसे बसाओ, हमारा क्या है

कभी जहाँ हम रहे वहाँ अब तुम्हीं बताओ हमारा क्या है

 

हमारे पहलू को छोड़कर जब चले गये तो चले गये तुम

जिसे भी चाहो उसे तुम अपने गले लगाओ, हमारा क्या है

जिसे तुम अपनी समझ रहे हो तुम्हारी महफ़िल नहीं है साहब

अगर जलानी है जान अपनी भले जलाओ, हमारा क्या है

 

कहा था तुमसे कि वो किसी का न हो सका है न हो सकेगा

उसी से फिर भी निभाना है तो निभाए जाओ हमारा, क्या है

 

अब उसकी बातें सुना के हमको हमारी नज़रों से मत गिरो तुम

तुम उससे तौबा करो कि उसको फिर आज़माओ, हमारा क्या है

 

अजीब हो तुम कि हर किसी से लगाया दिल औ’र ज़ख़्म खाये

अब इनको साहब हरा रखो या रफ़ू कराओ, हमारा क्या है

 

ज़मीं पै रहना नहीं किसी को गगन ही छूना है हर किसी को

हवा में तुम भी पतंग अपनी उड़ाये जाओ, हमारा क्या है

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