दिलों को जोड़ने वाले अगर हैं भी तो कितने हैं
मुहब्बत के हसीं क़िस्से अगर
हैं भी तो कितने हैं
ज़ुरूरत आन पड़ती है तभी मालूम
चलता है
हमारे हाथ में हीरे अगर हैं भी तो कितने हैं
हमारे हाथ में हीरे अगर हैं भी तो कितने हैं
हमारे हाथ में लमहे अगर हैं भी तो कितने हैं
हमारे संग दीवाने अगर हैं भी तो कितने हैं
हमारे नाम अफ़साने अगर हैं भी तो कितने हैं
मुक़द्दर में मगर मौक़े अगर हैं भी तो कितने हैं
किसी पर शेर या मिसरे अगर हैं भी तो कितने हैं
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