परिचय - नवीन सी चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

              संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

(ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

अब जैसे भी हुई हो भलाई हुई तो है

अब जैसे भी हुई हो भलाई हुई तो है।
नाकामियों ने राह दिखाई हुई तो है॥

इस बार बात बनने के इमकान हैं बहुत।
ग़म के सिवा ख़लिश भी सवाई हुई तो है॥

मरमरी बाँहों पे इस ख़ातिर फ़िदा रहता हूँ मैं

मरमरी बाँहों पे इस ख़ातिर फ़िदा रहता हूँ मैं ।
इन के घेरे में गुलाबों सा खिला रहता हूँ मैं ।।

कुछ करूँ ऐसा कि तुझको खोलने पड़ जाएँ लब । 
बस इसी हसरत से तुझको छेड़ता रहता हूँ मैं ।।  

चहचहाते थे लड़कपन में परिन्दों की तरह


चहचहाते थे लड़कपन में परिन्दों की तरह । 

आजकल राम रटा करते हैं तोतों की तरह ।।

 

अब तो मुश्किल से नज़र भर के कोई तकता है ।

बस टँगे रहते हैं हम चाँद-सितारों की तरह ।।

खाली-पीली वबाल क्या करना


खाली-पीली वबाल क्या करना । 

आओ सीखें मुक़ाबिला करना ।।

 

जिनकी बुनियाद ही मुहब्बत हो ।

उनके हक़ में सदा दुआ करना ।।

जब कि थे बीसियों ज़ाविये रंग में


जब कि थे बीसियों ज़ाविये रंग में।
हम ने ढूँढे फ़क़त मसअले रंग में॥

दीन लफ़्फ़ाज़ियों की बलि चढ गया।
आ गया नुक़्स अच्छे-भले रंग में॥

तुझ को तेरे ही ख़तावार सम्हाले हुये हैं


तुझ को तेरे ही ख़तावार सम्हाले हुये हैं ।
दिल तेरी बज़्म को दिलदार सम्हाले हुये हैं ॥

इश्क़ एक ऐसी अदालत है जिसे जनमों से ।
उस के अपने ही गुनहगार सम्हाले हुये हैं ॥

हवा के ज़ोर पे ज़ोर अपना आज़मा कर देख


हवा के ज़ोर पै ज़ोर अपना आज़मा कर देख । 
न उड़ सके तो कम-अज़-कम पतंग उड़ा कर देख ॥ 

फिर इस जहान की मिट्टी पलीद कर देना । 
पर उस से पहले नई बस्तियाँ बसा कर देख ॥

तमाम ख़ुश्क दयारों को आब देता था


तमाम ख़ुश्क दयारों को आब देता था।
हमारा दिल भी कभी आसमान जैसा था॥

अजीब लगती है मेहनत-कशों की बद-हाली।
यहाँ तलक तो मुक़द्दर को हार जाना था॥

काम आना हो तभी काम नहीं आते हैं


काम आना हो तभी काम नहीं आते हैं।
धूप के पाँव दिसम्बर में उखड़ जाते हैं॥

धूल-मिट्टी की तरह हम भी कोई ख़ास नहीं।
बस, हवा-पानी की सुहबत में सँवर जाते हैं॥

ऐसा ठुकराया है किसी की यादों ने


ऐसा ठुकराया है किसी की यादों ने।
जैसे पिंजड़े खोल दिये सय्यादों ने॥

उस पत्थर-दिल को शायद मालूम नहीं।
लैला को मशहूर किया फ़रियादों ने॥

दिल के दरवाज़े तलक बू-ए-वफ़ा आने दे

दिल के दरवाज़े तलक बू-ए-वफ़ा 1 आने दे।
धूल उड़ती है तो उड़ने दे - हवा आने दे॥

जाने वाले से भला इतनी मुहब्बत क्यों कर।
दिल की टहनी प कोई फूल नया आने दे॥

गर्मियों की रुत में सावन की घटाएँ ढूँढते हैं




गर्मियों की रुत में सावन की घटाएँ ढूँढते हैं।
नफ़रतों में भी मुहब्बत की फ़ज़ाएँ ढूँढते हैं।।

इस से बढ़कर और क्या होगी मुहब्बत की निशानी।
यार की भूलों में भी अपनी ख़ताएँ ढूँढते हैं।।

कभी तो राहे-मुहब्बत में ये कमाल दिखे

 

कभी तो राहे-मुहब्बत में ये कमाल दिखे।
बिना बताये उसे मेरे दिल का हाल दिखे।

दिल उस की सारी ख़ताएँ मुआफ़ कर देगा।
बस उस की आँखों में इक मरतबा मलाल दिखे॥

किसे मालूम है किस नाम पर आवै



किसे मालूम है किस नाम पर आवै।
चँदरमा क्या पता किस बाम पर आवै।।

सयाने लोग जिसको लुत्फ़ कहते हैं।
वु नश्शा क्या पता किस जाम पर आवै।।

हमसे मिल कर भी मुलाक़ात नहीं करते तुम



हमसे मिल कर भी मुलाक़ात नहीं करते तुम।
ये भी कुछ बात हुई बात नहीं करते तुम।

दर्दो-ग़म हमसे लिपटने को खुद तरसते हैं।
पेश, पर ये भी तो सौगात नहीं करते तुम॥

उदासियों के नगर में उमंग भर जाओ



उदासियों के नगर में उमंग भर जाओ।
कभी तो हमको भी छू कर निहाल कर जाओ।

नहीं बदन को ज़रा सा भी टच नहीं करना।
हमारी रूह से होते हुए गुज़र जाओ।।

ये रोज़-रोज़ का ही रूठना-मनाना क्या


ये रोज़-रोज़ का ही रूठना-मनाना क्या।
मुहब्बतों में सनम जीतना हराना क्या।।

पराई आँखों से जलधार को बहाना क्या।
नहीं है प्यार तो फिर प्यार का बहाना क्या।।

सुख चमेली की लड़ी हो जैसे


सुख चमेली की लड़ी हो जैसे।
और ग़म सोनजुही हो जैसे॥

हमने हर पीर समझनी थी यूँ।
गर्द, शबनम को मिली हो जैसे॥