यों ही फ़ाक़ों पर भला कबतक गुज़ारा हो हुज़ूर

 

यों ही फ़ाक़ों पर भला कबतक गुज़ारा हो हुज़ूर

कोई तो हम बेसहारों का सहारा हो हुज़ूर

 

हम जो टूटे तो सभी ने क्रॉस कर लीं उँगलियाँ

ज्यूँ हमारा ग़म कोई टूटा सितारा हो हुज़ूर

 अब हमारे संग उदासी रह रही है इस तरह

झील की लहरों पै ज्यों कोई शिकारा हो हुज़ूर

 

लग रही है यों तो यह आवाज़ कोयल सी हमें

ये भी मुमकिन है हमें उसने पुकारा हो हुज़ूर

 

ये तअल्लुक़ तो तअल्लुक़ की तरह लगता है बस

इश्क़ तो तब है कि जब हमपर इजारा हो हुज़ूर

 

पूछकर हमसे हमारा इम्तिहाँ मत लीजिए

जान दे देंगे अगर उसका इशारा हो हुज़ूर

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