बग़ैर इश्क़ मुहब्बत अजीब लगता है

 

बग़ैर इश्क़ मुहब्बत अजीब लगता है

अमीरे-शह्र भी सचमुच ग़रीब लगता है

 

पढ़ाई सी ए की हो या मुहब्बतों वाली

ये ऐसे कोर्स हैं जिनमें नसीब लगता है

 मैं कैसे मानूँ कि वो दूर हो गया मुझसे

हवा का दम घुटे इतना क़रीब लगता है

 

हवा के जैसे सभी से जुड़ा हुआ है वह

मुझे तो सारा ज़माना रक़ीब लगता है


मरज़ दिया है तो उसने इलाज़ भी है किया

वो है तो दुश्मने-जाँ पर हबीब लगता है 

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