अब आ गये हो तो नज़रें मिलाओ, बात करो।
हमारे दर से पलट कर न जाओ, बात करो॥
कोई भी गाँठ हो सुलझाने से सुलझती
है।
लिहाज़ा कुछ भी न हम से छुपाओ, बात करो॥
शिकायतें भी मुहब्बत-शनास होती
हैं।
भले हमारी ख़ताएँ गिनाओ, बात करो॥
हुज़ूर हम भी हुनर बा-कमाल रखते
हैं।
कभी हमें भी बुलाओ, बिठाओ, बात
करो॥
अगर ज़हाँ को सुनानी है अपने दिल
की बात।
तो उस के सुर में सुर अपना मिलाओ, बात करो॥
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