ज़िन्दगी है निखार लमहों का

ज़िन्दगी है निखार लमहों का ।
कीजिये ऐतबार लमहों का ॥

आज परियाँ उतरने वाली हैं ।
झट से आँगन बुहार लमहों का ॥

हम-शुआएँ तेरी तलब में हैं ।
वक़्त! दामन पसार लमहों का ॥

उस ने सदियाँ निसार दीं हम पर ।
हम ने माँगा था प्यार लमहों का ॥

जिसने पाया वही समझ पाया ।
एक बोसा हज़ार लमहों का ॥

हम तो उस एक पल में ही गुम हैं ।
कैसे करते शुमार लमहों का ॥

'नवीन' अब तो होश में आ जा।
सर से नश्शा उतार लमहों का ॥

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