मुरव्वत को बचाना चाहता हूँ

मुरव्वत को बचाना चाहता हूँ।
लिहाज़ा टूट जाना चाहता हूँ॥

फ़लक़ से रूठ जाना चाहता हूँ।
ज़मीं से दिल लगाना चाहता हूँ॥

अना का सर झुकाना चाहता हूँ। 
दरी-चादर बिछाना चाहता हूँ॥

बहाना है फ़लक़ पर टिमटिमाना।
फ़ना हो कर दिखाना चाहता हूँ॥

किसी को लूट कर मैं क्या करूँगा।
मैं तो ख़ुद को लुटाना चाहता हूँ॥

नज़र ख़ुद से मिलाऊँ भी तो कैसे।
तुम्हारा ग़म छुपाना चाहता हूँ॥

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