देखते-देखते
अफ़सानों में ढल जाते हैं।
दिल
की बातों में जो आते हैं,
बदल जाते हैं॥
ज़िन्दगी
चैन से जीने ही नहीं देती है।
दिल
सँभलता है तो अरमान मचल जाते हैं॥
अश्क़
आँखों से छलकते नहीं तो क्या करते।
दिल
सुलगता है तो एहसास पिघल जाते हैं॥
उस के
सीने में कहीं दिल की जगह सिल तो नहीं।
चूँकि
बच्चे तो बहुत जल्द बहल जाते हैं॥
जिस्म
की क़ैद से हम छूटें तो किस तर्ह 'नवीन'।
दिल
की दहलीज़ पे आते ही फिसल जाते हैं॥
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